"स्कूल वो जगह होती है जहां बच्चों को सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए… लेकिन मेरठ के कस्तूरबा बालिका विद्यालय में तो ऐसा लगता है जैसे 'सुरक्षा' शब्द ही गायब हो गया! 7वीं कक्षा की तीन मासूम छात्राएं लापता, स्कूल स्टाफ बेपरवाह, और शिक्षिकाएं बच्चियों से करवा रही थीं घर के काम… ये कैसी 'शिक्षा' है भला?
आइए जानते हैं इस हैरान कर देने वाले मामले की पूरी कहानी…"
तीन छात्राओं के अपहरण का मुकदमा दर्ज
मेरठ के कस्तूरबा बालिका विद्यालय से तीन छात्राओं के लापता होने का मामला सामने आया है। यह घटना मेरठ के सरूरपुर थाना क्षेत्र में घटी, जहां पर तीन छात्राओं के अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से छात्राओं की खोजबीन शुरू कर दी है, और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
यह घटना तब सामने आई जब स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण सातवीं कक्षा की तीन छात्राएं अचानक गायब हो गईं। बेसिक शिक्षा अधिकारी, आशा चौधरी ने इस पूरे मामले को घंटों तक दबाए रखा, जिसके बाद मामले में गंभीरता से कार्रवाई की गई।
सचाई के परतों से पर्दा उठाने वाली जानकारी
इस पूरी घटना के पीछे स्कूल प्रबंधन और शिक्षिकाओं की गंभीर लापरवाही सामने आई है। स्कूल की वार्डन और प्रिंसिपल, रीना ने स्कूल में रहकर बच्चों का ध्यान रखने के बजाय उन्हें किराए के घरों में रहने के लिए मजबूर कर दिया। यही नहीं, शिक्षिकाएं और वार्डन खुद भी स्कूल की जगह किराए के घरों में रहते थे और बालिकाओं को स्कूल से बाहर ले जाकर उनके घरों में काम करवाती थीं।
बालिकाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी पर सवाल
इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि आखिरकार बालिकाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? जब स्कूल प्रबंधन और स्टाफ खुद लापरवाह थे, तो बच्चों की सुरक्षा पर कैसे ध्यान दिया जा सकता था? इस मामले में जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग हो रही है।
कहां पर है यह कस्तूरबा विद्यालय?
यह विद्यालय मेरठ-शामली NH पर भूनी गांव में स्थित है और यहां पर आदिवासी और गरीब बच्चों को शिक्षा देने का काम किया जाता है। लेकिन इस घटना ने विद्यालय की प्रतिष्ठा पर गहरी छाप छोड़ी है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में किस तरह से जांच को आगे बढ़ाते हैं और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ क्या कड़ी कार्रवाई होती है।
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