- योगी सरकार द्वारा गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे किए जाने को लेकर आयोजित सम्मेलन में प्रदेश के तकरीबन 250 मदरसा संचालकों ने भाग लिया | सच्चाईयाँ न्यूज़

रविवार, 18 सितंबर 2022

योगी सरकार द्वारा गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे किए जाने को लेकर आयोजित सम्मेलन में प्रदेश के तकरीबन 250 मदरसा संचालकों ने भाग लिया

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे किए जाने को लेकर आयोजित सम्मेलन में प्रदेश के तकरीबन 250 मदरसा संचालकों ने भाग लिया। इस दौरान मदरसों के सर्वे को लेकर विचार-विमर्श के बाद अपनी राय रखीं। इस दौरान दारुल उलूम देवबंद के मौलाना अरशद मदनी ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि देश की आजादी में मदरसों की कुर्बानियों को भुलाया नहीं जा सकता है, मदरसे देश के संविधान के अंतर्गत चलते हैं और मदरसों के अंदर कोई भी ढकी-दबी चीज नहीं है, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराए जा रहे सर्वे से बिल्कुल डरने और घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सर्वे में सहयोग करते हुए संपूर्ण और सही जानकारी दें। मदरसा सम्मेलन के बाद महमूद हाॅल में मीडिया से बात करते हुए मौलाना अरशद मदनी ने स्पष्ट किया है कि उन्हें योगी सरकार के मदरसों के सर्वे से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने मदरसा संचालकों से आह्वान किया है कि वे सर्वे में सहयोग करें क्योंकि मदरसों के अंदर कुछ भी ढका-छिपा नहीं है, सबके लिए मदरसों के दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं।बता दें कि एक तरफ जहां मदरसा संचालक सर्वे में टीमों का भरपूर सहयोग कर रहे हैं। वहीं, वह दारुल उलूम के फैसले का भी बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे थे। प्रदेश सरकार के आदेश पर 10 सितंबर से गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे चल रहा है। इसको लेकर उलमा प्रदेश सरकार की नीयत पर सवाल भी खड़े कर चुके हैं। इसी को लेकर आज सम्मेलन हुआ।बता दें कि एक तरफ जहां मदरसा संचालक सर्वे में टीमों का भरपूर सहयोग कर रहे हैं। वहीं, वह दारुल उलूम के फैसले का भी बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे थे। प्रदेश सरकार के आदेश पर 10 सितंबर से गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे चल रहा है। इसको लेकर उलमा प्रदेश सरकार की नीयत पर सवाल भी खड़े कर चुके हैं। इसी को लेकर आज सम्मेलन हुआ। सम्मेलन का आयोजन प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया के भीतर हुआ। शनिवार शाम से ही प्रदेश के प्रमुख उलमा देवबंद पहुंचना शुरू हो गए थे। वहीं इस सम्मेलन में मीडिया की नो एंट्री रही। पत्रकारों को प्रवेश नहीं दिया गया। हालांकि बैठक के बाद मौलाना अरशद मदनी ने पत्रकार वार्ता में सवालों के जवाब दिए और सर्वे पर अपनी राय रखी।जमीअत-उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी और दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने सम्मेलन में संबोधित करते हुए मदरसों के इतिहास पर प्रकाश डाला और मदरसा संचालकों को शिक्षा अधिनियम और देश के संविधान के अंतर्गत दी गई धार्मिक आजादी के अनुसार शिक्षण कार्य करने पर बल देते हुए सर्वे में सहयोग करने और अपने मदरसों के बारे में संपूर्ण और सही जानकारी देने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि हमें डरने और घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि मदरसों ने देश की आजादी और उसके निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई है। उन्होंने सभी मदरसा संचालकों से अपने दस्तावेज और जमीन के रख-रखाव को ठीक रखने पर बल दिया।सम्मेलन के दौरान मदारिस इस्लामिया के नाजिम मौलाना मुफ्ती शौकत बस्तवी ने कहा कि मदरसे कभी भी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं पाए गए हैं। इसलिए मीडिया को मदरसों को लेकर सकारात्मक रवैया रखना चाहिए। मदरसों का अपना हिसाब-किताब है, अपने दस्तावेज और हिसाब-किताब को पारदर्शी रखें। उन्होंने कहा कि सर्वे से घर भरने और घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि मदरसे खुली किताब हैं और सभी के दरवाजे हमेशा इनके लिए खुले हुए हैं। इसलिए अगर सरकार सर्वे करती है उससे डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसमें संपूर्ण सहयोग और सही जानकारी दें।

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